देहरादून में कानून-व्यवस्था पर सख्त हुए DGP
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दो महिला हत्याकांडों के बाद लापरवाही पर 3 सब-इंस्पेक्टर निलंबित
उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ ने मंगलवार शाम राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सभी 13 जिलों के एसएसपी और एसपी शामिल हुए। यह बैठक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस सख्त हिदायत के एक दिन बाद हुई, जिसमें उन्होंने पुलिस को भूमि विवादों में समय बर्बाद करने के बजाय अपराध नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करने को कहा था।
बैठक के दौरान देहरादून जिले में पिछले एक सप्ताह में हुई दो महिलाओं की निर्मम हत्याओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया। लापरवाही पाए जाने पर AIIMS ऋषिकेश चेकपोस्ट प्रभारी एसआई साहिल वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं, पलटन बाजार क्षेत्र में युवती की हत्या के मामले में खुदबुड़ा चेकपोस्ट प्रभारी एसआई प्रद्युम्न नेगी को भी सस्पेंड किया गया।
इसके अलावा, हरिद्वार जिले के भगवानपुर क्षेत्र में रविदास जयंती शोभायात्रा के दौरान दो गुटों के बीच हुए झगड़े और फायरिंग की घटना में “गंभीर लापरवाही” के चलते चुडियाला हल्का प्रभारी एसआई सूरत शर्मा को भी निलंबित कर दिया गया।
दोनों देहरादून हत्याकांडों की जांच अब एसपी (क्राइम) विशाखा भदाणे को सौंपी गई है, जिन्हें एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, हरिद्वार की घटना की जांच एसपी (क्राइम) जितेंद्र मेहरा करेंगे।
DGP ने बैठक में साफ चेतावनी दी कि पुलिसकर्मी सिविल मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें। अब सर्किल अधिकारी स्तर पर प्रारंभिक जांच अनिवार्य होगी, जिससे यह स्पष्ट किया जा सके कि मामला सिविल है या आपराधिक। भूमि विवाद से जुड़े लंबित मामलों की निगरानी सीधे पुलिस मुख्यालय करेगा।
साथ ही, मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश विजिलेंस विभाग को दिए गए हैं
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