नैनीताल हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी 800 करोड़ के चिटफंड घोटाले की जांच

Sep 17, 2025 - 19:27
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नैनीताल हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी 800 करोड़ के चिटफंड घोटाले की जांच


नैनीताल। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने चिटफंड कम्पनी एल.यू.सी.सी. द्वारा प्रदेश के नागरिकों को अपने स्थानीय एजेंटों के माध्यम से 800 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाकर फरार होने और घटना की सीबीआई जांच कराने संबंधी याचिका में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद खण्डपीठ ने इसकी जांच सीबीआई से कराने के आदेश दे दिए हैं। न्यायालय ने यह भी कहा है कि जिन लोगों का पैसा लेकर कम्पनी फरार हुई वो अपनी शिकायत सीबीआई को दें।


आज हुई सुनवाई में सीबीआई की तरफ से कहा गया कि पूर्व में जब जनहित याचिका पर सुनवाई हुई थी तब न्यायालय ने सीबीआई से पूछा था कि क्या सीबीआई इस मामले की जांच कर सकती है? आज उन्होंने अवगत कराया गया कि सीबीआई की तरफ से इस मामले की जांच करने की अनुमति मिल चुकी है। उनके द्वारा स्वीकृत पत्र न्यायालय में पेश किया गया। इस घटना की जांच कर रही राज्य पुलिस की तरफ से कहा गया कि अभी तक कई मामले दर्ज हो चुके हैं और अन्य की जाँच चल रही है। इसका विरोध करते हुए 27 पीड़ितों की तरफ से कहा गया कि पुलिस ने अभी तक उनका मुकदमा दर्ज ही नहीं किया है। जबतक मुकदमा दर्ज नहीं होगा तबतक उनका डूबा हुआ पैसा वापस नही मिलेगा। खंडपीठ ने उनसे कहा कि वे अपनी शिकायत सीबीआई को दें। वो रुपये देने के प्रमाण भी उस शिकायत में संग्लन करें।


आपको बता दे कि ऋषिकेश निवासी आशुतोष व अन्य ने जनहित याचिका व अन्य लोगो के माध्यम से दायर याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनवाई की। इसमें कहा गया है कि एल.यू.सी.सी. नाम की एक चिटफंड कम्पनी ने वर्ष 2021 में प्रदेश के कई जिलों के लोगो को कई तरह के लाभ देने के उद्देश्य से अपना ऑफिस देहरादून, ऋषिकेश सहित पौड़ी में खुलवाए। उसके बाद स्थानीय लोगो को अपना एजेंट नियुक्त किया। कंपनी ने एजेंटो के माध्यम से अपने करीबियों से निवेश करने को कहा। लोगों ने सहानुभूति दिखाकर निवेश भी किया। जबकि राज्य में कम्पनी ने सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत अपना रजिस्ट्रेशन तक नही कराया। वर्ष 2023-24 में यह कम्पनी अपने ऑफिस बंद कर चली गयी।


निवेशकों की शिकायत पर प्रदेश में 14 जबकि अन्य राज्यो में इस कम्पनी के खिलाफ 56 मुकदमे दर्ज हुए। पता चला कि मुख्य आरोपी दुबई भाग गया है। अब निवेशक एजेंटो को परेशान कर रहे हैं। पुलिस भी परेशान कर रही है। आज मामले की जाँच कर रहे आई.ओ.न्यायालय में पेश हुए। जनहित याचिका में कहा गया कि अगर राज्य के भीतर कोई बाहरी कम्पनी बिना रजिस्ट्रेशन के कार्य कर रही है तो सोसाईटी के सदस्य सोए हुए थे या राज्य सरकार सोई थी ? इसकी जाँच कराई जाय।

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