डीआईपी–एफआरआई से 6 महीनों में ₹660 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी रोकी गई
डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर 1000+ बैंक और भुगतान संस्थान जुड़े, संचार साथी से बढ़ी जनभागीदारी |
नई दिल्ली
दूरसंचार विभाग (DoT) के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) पर साइबर धोखाधड़ी में दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए 1000 से अधिक बैंक, थर्ड पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर (TPAP) और वित्तीय संस्थान शामिल हो चुके हैं। यह प्रगति वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (FRI) के सफल कार्यान्वयन का परिणाम है, जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के सक्रिय सहयोग से विकसित किया गया है।
दूरसंचार विभाग के अनुसार, एफआरआई के लॉन्च (22 मई 2025) के बाद महज छह महीनों में लगभग ₹660 करोड़ की संभावित साइबर धोखाधड़ी को रोका गया है। डीआईपी पर उपलब्ध एफआरआई का उपयोग करते हुए बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने बड़ी संख्या में संदिग्ध लेनदेन को या तो अस्वीकार किया या समय रहते चेतावनी जारी की, जिससे बैंकिंग प्रणाली को बड़े वित्तीय नुकसान से बचाया जा सका।
साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए, जहां डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले और सिम-बॉक्स जैसे संगठित नेटवर्क तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं जनभागीदारी एक मजबूत हथियार बनकर उभरी है। संचार साथी प्लेटफॉर्म नागरिकों को संदिग्ध कॉल, संदेश, फर्जी कनेक्शन और खोए/चोरी हुए मोबाइल की रिपोर्ट करने का सशक्त माध्यम प्रदान कर रहा है। इससे एफआरआई को निरंतर महत्वपूर्ण इनपुट मिल रहा है।
दूरसंचार विभाग ने बताया कि एफआरआई को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए अब तक 16 ज्ञान-साझाकरण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। विभाग उन जागरूक नागरिकों और ‘साइबर योद्धाओं’ की सराहना करता है, जो www.sancharsaathi.gov.in पोर्टल और मोबाइल ऐप का सक्रिय उपयोग कर रहे हैं। एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर संचार साथी ऐप की बढ़ती लोकप्रियता नागरिकों के भरोसे और सक्रिय सहभागिता को दर्शाती है।
संचार साथी पहल के तहत नागरिक न केवल स्वयं सुरक्षित रह सकते हैं, बल्कि धोखेबाजों को कम जानकारी वाले लोगों को निशाना बनाने से रोकने में भी मदद कर सकते हैं। रिपोर्टिंग की सुविधा से अधिकारियों और दूरसंचार ऑपरेटरों को धोखाधड़ी के पैटर्न पहचानने, फर्जी नंबर ब्लॉक करने और बार-बार अपराध करने वालों पर कार्रवाई करने में सहायता मिल रही है।
दूरसंचार विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे संचार साथी वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप का अधिकतम उपयोग करें और भारत के डिजिटल भुगतान इको-सिस्टम को सुरक्षित बनाने में सहयोग दें। विभाग ने RBI, NPCI, SEBI, PFRDA, बैंकों, वित्तीय संस्थानों, भुगतान ऑपरेटरों और आम जनता के साथ निरंतर सहयोग की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
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