भारत–यूरोपीय संघ रक्षा सहयोग को नई गतिभारत–यूरोपीय संघ रक्षा सहयोग को नई गति

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Nov 30, -0001 - 00:00
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भारत–यूरोपीय संघ रक्षा सहयोग को नई गतिभारत–यूरोपीय संघ रक्षा सहयोग को नई गति

नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ईयू की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास के बीच रणनीतिक सुरक्षा वार्ता

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में यूरोपियन यूनियन आयोग की उच्च प्रतिनिधि/उपाध्यक्ष सुश्री काजा कल्लास से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग से जुड़े व्यापक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन जैसे साझा मूल्यों पर आधारित साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि इन मूल्यों को वैश्विक स्थिरता, सतत विकास और समावेशी समृद्धि के लिए व्यावहारिक सहयोग में बदला जाना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने वैश्विक सुरक्षा हितों के लिए भारतीय और यूरोपीय संघ के रक्षा उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के साथ-साथ यूरोपीय संघ की रणनीतिक स्वायत्तता की सोच को भी मजबूती देगा। आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकीकरण से यह साझेदारी भविष्य के लिए तैयार, विश्वसनीय रक्षा इकोसिस्टम के निर्माण में एक “फोर्स मल्टीप्लायर” साबित हो सकती है।

श्री सिंह ने यह भी कहा कि भारत का रक्षा उद्योग यूरोपीय संघ की ‘री-आर्म पहल’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब यूरोपीय संघ अपने आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने और जोखिम कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर सुश्री कल्लास की भारत यात्रा को विशेष बताया।

सुश्री काजा कल्लास ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के लिए आभार व्यक्त किया और कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में यूरोपीय संघ की भागीदारी को सम्मान की बात बताया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ को हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से सहयोग बढ़ाना चाहिए।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने गुरुग्राम स्थित सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) में यूरोपीय संघ के संपर्क अधिकारी की तैनाती के प्रस्ताव का स्वागत किया। इससे समुद्री डकैती रोधी अभियानों और क्षेत्रीय खतरों के आकलन में भारतीय नौसेना के साथ परिचालन समन्वय और मजबूत होगा।

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