ई-चालान काटना आसान, वसूली बनी बड़ी चुनौती; बकायेदारों पर सख्ती की तैयारी में परिवहन विभाग
उत्तराखंड में 2 लाख से ज्यादा ई-चालान, सिर्फ 37,755 का जुर्माना जमा; RC, फिटनेस और वाहन ट्रांसफर जैसी सेवाओं पर लग सकती है रोक
देहरादून: उत्तराखंड में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग और पुलिस लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए वाहनों के चालान करने के साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को सीज भी किया जा रहा है। वहीं, शहरों और बॉर्डर क्षेत्रों में लगाए गए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों के जरिए भी नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के ई-चालान किए जा रहे हैं। हालांकि, ई-चालान जारी होने के बाद जुर्माने की वसूली विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब बकाया चालानों की वसूली के लिए परिवहन विभाग सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
ई-चालान हो रहे ज्यादा, लेकिन जुर्माना जमा करने में पीछे वाहन स्वामी
परिवहन विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या ई-चालान की राशि वसूलने को लेकर आ रही है। ऑफलाइन चालान होने पर जहां कई वाहन चालक जुर्माना जमा कर देते हैं, वहीं ऑनलाइन ई-चालान होने के बाद बड़ी संख्या में वाहन स्वामी भुगतान नहीं कर रहे हैं। ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान कर चालान काटना तो आसान हो गया है, लेकिन जुर्माने की वसूली करना मुश्किल साबित हो रहा है। यह समस्या केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। देशभर में ई-चालान की बड़ी राशि लंबित है। इसी को देखते हुए अब बकायेदार वाहन स्वामियों पर कार्रवाई के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हुई चर्चा
देहरादून में 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इस दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ ही लंबित ई-चालानों की वसूली पर भी चर्चा की गई। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने और जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार, ई-चालान की वसूली को प्रभावी बनाने के लिए वाहन से संबंधित विभिन्न सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) का नवीनीकरण, डुप्लीकेट आरसी जारी करने, वाहन स्वामी का पता बदलने और वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित करने जैसी सेवाएं शामिल हैं।
लंबे समय से ई-चालान का जुर्माना जमा नहीं करने वाले वाहन स्वामियों के खिलाफ सख्ती के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
इन कदमों का उद्देश्य वाहन स्वामियों को लंबित जुर्माना जमा करने के लिए प्रेरित करना और यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करना है। हालांकि, इन प्रतिबंधों को लागू करने की प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों और आधिकारिक निर्देशों के अधीन होगी।
खबर में उद्धृत सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर 2026 के आदेश के अनुसार, देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ई-चालानों के मद में करीब 49,194 करोड़ रुपये की वसूली की जानी थी। इनमें से लगभग 26,175 करोड़ रुपये ही वसूल हो पाए हैं, जबकि करीब 23,019 करोड़ रुपये की राशि अब भी बकाया है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बड़ी संख्या में चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। इसी दिशा में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इलेक्ट्रॉनिक निगरानी व्यवस्था और ई-चालान प्रणाली को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड में भी ई-चालान की वसूली की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में अगस्त तक ANPR कैमरों के माध्यम से राज्य में कुल 2,01,015 ई-चालान किए गए। इनमें से केवल 37,755 चालानों का जुर्माना जमा हुआ है। इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में ई-चालानों का भुगतान अब भी लंबित है। ऐसे में परिवहन विभाग के सामने चालान की राशि वसूलने के साथ-साथ वाहन चालकों में यातायात नियमों के प्रति जवाबदेही बढ़ाने की भी चुनौती है।
ANPR कैमरों के माध्यम से अगस्त 2026 तक किए गए ई-चालानों की जिलावार स्थिति इस प्रकार है:
आंकड़ों के मुताबिक, ऊधमसिंह नगर में सबसे ज्यादा 63,854 ई-चालान किए गए हैं। वहीं, देहरादून में सबसे अधिक 13,477 चालानों का जुर्माना जमा हुआ है। हरिद्वार में 42 हजार से ज्यादा ई-चालान होने के बावजूद केवल 4,265 चालानों का भुगतान हुआ है।
ई-चालान की वसूली बढ़ाने के लिए परिवहन विभाग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इस प्रक्रिया में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 28 अक्टूबर 2025 की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A के अनुपालन पर भी जोर दिया गया है।
विभाग की योजना है कि ई-चालान जारी करने के साथ-साथ उनकी वसूली भी सुनिश्चित की जाए। इसके लिए वाहन से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं पर संभावित प्रतिबंधों और अन्य नियमानुसार कार्रवाई के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। आने वाले समय में इन कदमों के जरिए लंबित जुर्माने की वसूली बढ़ाने और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
ई-चालान बकाया होने पर इन सेवाओं पर लग सकती है रोक
देशभर में 23 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का ई-चालान बकाया
उत्तराखंड में 2.01 लाख ई-चालान, केवल 37,755 का भुगतान
ऊधमसिंह नगर में सबसे ज्यादा चालान, हरिद्वार में भुगतान कम
मोटर वाहन अधिनियम और MoRTH की SOP के अनुपालन पर जोर
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मेटा डिस्क्रिप्शन: उत्तराखंड में 2 लाख से ज्यादा ई-चालान के बावजूद केवल 37,755 का जुर्माना जमा हुआ। जानिए बकायेदार वाहन स्वामियों पर परिवहन विभाग क्या कार्रवाई कर सकता है।
प्रकाशन से पहले ध्यान दें: जिलावार आंकड़ों का कुल योग राज्य के बताए गए कुल चालानों से मेल नहीं खाता। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और प्रस्तावित प्रतिबंधों की आधिकारिक पुष्टि कर लें।
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