मौसम अलर्ट के बीच आपदा प्रबंधन अलर्ट, संवेदनशील क्षेत्रों की 24 घंटे होगी निगरानी

Aug 11, 2026 - 10:59
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मौसम अलर्ट के बीच आपदा प्रबंधन अलर्ट, संवेदनशील क्षेत्रों की 24 घंटे होगी निगरानी

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून के बीच लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर सरकारी मशीनरी की चिंता बढ़ा दी है. मौसम विभाग की ओर से कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किए जाने के बाद अब आपदा प्रबंधन विभाग ने भी अपनी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है. संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं, जबकि पर्वतीय जिलों में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है.

दरअसल प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है. ऐसे में कम समय में होने वाली तेज बारिश को लेकर सबसे ज्यादा चिंता पर्वतीय क्षेत्रों की है. बारिश के दौरान भूस्खलन, सड़क बंद होने, जलभराव और नदियों-नालों के जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं. यही वजह है कि मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं.

मौसम विभाग ने फिलहाल प्रदेश के कई जिलों को ऑरेंज और येलो अलर्ट की श्रेणी में रखा है. ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत शामिल हैं. वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, चमोली, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. इन इलाकों में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने के साथ ही संभावित आपदा की स्थिति में तत्काल रिस्पॉन्स सुनिश्चित करने को कहा गया है.

खास तौर पर पर्वतीय जनपदों के उन इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है, जिन्हें पहले से ही भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है. इन क्षेत्रों में सरकारी मशीनरी और संबंधित विभागों को पहले से जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, लेकिन ताजा मौसम अलर्ट के बाद जिला प्रशासन को अतिरिक्त एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं. सड़क मार्गों पर जेसीबी और अन्य जरूरी मशीनरी की उपलब्धता बनाए रखने के साथ ही आपात स्थिति में राहत और बचाव दल को तत्काल सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है.

वहीं बारिश के इस अलर्ट के बीच चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है. प्रदेश में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए जिला प्रशासन को आपात स्थिति में यात्रियों के ठहरने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. जरूरत पड़ने पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोकने और मौसम सामान्य होने के बाद ही आगे भेजने की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है.

आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जिलों को आवश्यक संसाधनों और बजट की उपलब्धता को लेकर भी लगातार काम किया जा रहा है. विभिन्न जिलों से आपदा प्रबंधन के लिए प्राप्त मांग के आधार पर बजट जारी किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव से जुड़ी तैयारियों में किसी तरह की कमी न रहे.
-विनोद कुमार सुमन, सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग

आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन के मुताबिक मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है. खास तौर पर देहरादून और हिमाचल से सटे क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है. हालांकि, इसके साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों में भी अधिकारियों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं.कम समय में अत्यधिक बारिश होने की स्थिति में उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में नुकसान की आशंका बढ़ जाती है.

ऐसे में बादल फटने जैसी किसी विशेष घटना का पूर्वानुमान फिलहाल मौसम विभाग की ओर से नहीं दिया गया है, लेकिन आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी रखी जा रही है. यानी आने वाले दिनों में मौसम के अलर्ट के बीच उत्तराखंड में प्रशासन की नजर सिर्फ बारिश पर नहीं, बल्कि उन सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर रहेगी जहां तेज बारिश के बाद हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं. चारधाम और कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा से लेकर सड़क, भूस्खलन और राहत-बचाव व्यवस्था तक, सभी स्तरों पर अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही है.

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