चुनाव से पहले कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, छह दिशाओं से निकलेगी यात्रा; बदरीनाथ धाम में होगा समापन

Oct 16, 2026 - 11:31
Oct 31, 2026 - 11:53
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चुनाव से पहले कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, छह दिशाओं से निकलेगी यात्रा; बदरीनाथ धाम में होगा समापन
चुनाव से पहले कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, छह दिशाओं से निकलेगी यात्रा; बदरीनाथ धाम में होगा समापन

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रणनीति तेज कर दी है। पार्टी प्रदेश की चारों दिशाओं से यात्रा निकालकर धामी सरकार को अंकिता भंडारी हत्याकांड, पेपर लीक मामलों, मंदिरों में कथित चंदा चोरी, बढ़ते अपराध और महिला उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। प्रस्तावित यात्रा का समापन बदरीनाथ धाम में होगा।

कांग्रेस नेताओं के बीच यात्रा को लेकर प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है। हालांकि, यात्रा की तारीखों और रूट को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान की ओर से लिया जाएगा। इसके बाद ही यात्रा का औपचारिक कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

छह क्षेत्रों से निकलेंगी यात्राएं

पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत के मुताबिक, धारचूला, हरिद्वार, चकराता, पुरोला, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल से वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में यात्राएं निकालने की योजना है। अलग-अलग क्षेत्रों से निकलने वाली ये यात्राएं चमोली जिले में एकत्रित होंगी, जहां से सभी नेता और कार्यकर्ता बदरीनाथ धाम पहुंचेंगे।

अंकिता भंडारी केस से लेकर पेपर लीक तक उठेंगे मुद्दे

कांग्रेस इस यात्रा के जरिए प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध, महिला उत्पीड़न, पेपर लीक प्रकरण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। इसके अलावा केदारनाथ मंदिर और भगवान विष्णु के मंदिर से जुड़े कथित चंदा विवाद को लेकर भी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरी विशाल के दरबार में चढ़ावा अर्पित किया जाएगा और प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर न्याय की गुहार लगाई जाएगी।

यात्रा के नाम पर भी होगा फैसला

कांग्रेस की इस प्रस्तावित यात्रा को जन जागरण यात्रा, जन क्रांति, लोकतंत्र बचाओ क्रांति या संकल्प यात्रा जैसे नाम दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल यात्रा की तारीख, अंतिम रूट और नाम पर मुहर लगना बाकी है। राजनीतिक दृष्टि से कांग्रेस की इस पहल को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रमुख मुद्दों को धार देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

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