उत्तराखंड में बारिश-ओलावृष्टि से किसानों को बड़ा नुकसान, 8,372 हेक्टेयर से ज्यादा खरीफ फसल प्रभावित; मुआवजे का भरोसा

Oct 14, 2026 - 10:57
Oct 31, 2026 - 12:05
 0  0
उत्तराखंड में बारिश-ओलावृष्टि से किसानों को बड़ा नुकसान, 8,372 हेक्टेयर से ज्यादा खरीफ फसल प्रभावित; मुआवजे का भरोसा
उत्तराखंड में बारिश-ओलावृष्टि से किसानों को बड़ा नुकसान, 8,372 हेक्टेयर से ज्यादा खरीफ फसल प्रभावित; मुआवजे का भरोसा

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश और ओलावृष्टि का असर किसानों पर भारी पड़ रहा है। प्रदेश में अतिवृष्टि के कारण खरीफ की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। कृषि निदेशालय की 9 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में खरीफ की 8,372.308 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा नुकसान ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिले में सामने आया है। वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी फसलों, सब्जियों और पॉलीहाउस को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है।

प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए विभागीय स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किसानों को नियमानुसार मुआवजा देने का भरोसा दिलाया है। दूसरी ओर, प्रभावित किसान फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं।

ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार में सबसे ज्यादा नुकसान

कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में दर्ज कुल प्रभावित कृषि क्षेत्रफल का बड़ा हिस्सा मैदानी जिलों में है। ऊधमसिंह नगर में करीब 7,730 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है, जबकि हरिद्वार में 600.133 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान दर्ज किया गया है। अन्य जिलों में लगभग 42.175 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित बताया गया है।

ऊधमसिंह नगर में मुख्य रूप से धान और गन्ने की फसल पर असर पड़ा है, जबकि हरिद्वार में धान की फसल प्रभावित हुई है। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रफल और पूरी तरह बर्बाद हुई फसल का आंकड़ा अलग-अलग होता है। नुकसान की वास्तविक आर्थिक स्थिति विस्तृत सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

बाजपुर और गदरपुर में धान-गन्ने की फसल प्रभावित

ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर और गदरपुर क्षेत्रों में अतिवृष्टि से कृषि भूमि को सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया है। विभागीय रिपोर्ट में बेरिया दौलत, चंदनपुरा, महोली जंगल, मड़इया हट्टू, बांसखेड़ी, बन्नाखेड़ा, बरहैनी, हुलसनगंज, खमरिया, शिवपुरी और टांडा महमूद सहित कई गांवों का उल्लेख है।

इन क्षेत्रों में धान और गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने के कारण किसानों को फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को लेकर चिंता है। हरिद्वार जिले के बहादराबाद, फेरुपुर और बादशाहपुर क्षेत्रों में भी करीब 600.133 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित दर्ज की गई है।

पहाड़ों में बागवानी और सब्जियों पर भी मार

बारिश और ओलावृष्टि का असर केवल मैदानी क्षेत्रों की फसलों तक सीमित नहीं है। कृषि मंत्री गणेश जोशी के कार्यालय से 10 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, कई पर्वतीय जिलों में बागवानी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।

  • अल्मोड़ा: चौखुटिया और लमगड़ा में 15 से 70 प्रतिशत तक नुकसान का प्रारंभिक आकलन।
  • चम्पावत: चम्पावत, पाटी, लोहाघाट और बाराकोट में 33 प्रतिशत से अधिक क्षति दर्ज।
  • नैनीताल: हल्द्वानी, कोटाबाग और रामनगर में करीब 10 प्रतिशत नुकसान।
  • देहरादून: रायपुर क्षेत्र में 10 से 15 प्रतिशत तक क्षति।
  • रुद्रप्रयाग: करीब 20 प्रतिशत नुकसान का आकलन।
  • टिहरी और पौड़ी: संबंधित क्षेत्रों में लगभग 30 प्रतिशत तक नुकसान की जानकारी।

ये आंकड़े संबंधित क्षेत्रों के प्रारंभिक आकलन पर आधारित हैं। इन्हें पूरे जिले की फसलों में हुए नुकसान का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता। विस्तृत सर्वे के बाद ही प्रभावित बागानों और किसानों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

सेब और सब्जियों की फसल खराब होने से किसान परेशान

देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र के त्यूनी स्थित सिड़िया गांव के किसान जोगेंद्र सिंह ने बताया कि बेमौसम बारिश से सेब के साथ टमाटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी और बंदगोभी की फसलों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने सरकार से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।पहाड़ी क्षेत्रों में अनेक किसान बागवानी और मौसमी सब्जियों के उत्पादन पर निर्भर हैं। ऐसे में फसलों को नुकसान होने से उनकी मौजूदा सीजन की आमदनी प्रभावित होने के साथ अगली फसल की तैयारी भी मुश्किल हो सकती है। हालांकि, त्यूनी क्षेत्र में कुल कितने किसान प्रभावित हुए हैं और आर्थिक नुकसान कितना है, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

किसानों को मिलेगा नियमानुसार मुआवजा

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा है कि प्रभावित किसानों को केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उनके कार्यालय से जारी जानकारी के मुताबिक, प्रारंभिक सर्वे पूरा किया जा चुका है और कृषि विभाग तथा राजस्व विभाग के कार्मिकों के माध्यम से संयुक्त सर्वे की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। फसल बीमा कराने वाले किसानों की क्षति संबंधी रिपोर्ट बीमा कंपनियों को भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है। मुआवजे की पात्रता और वास्तविक सहायता का निर्धारण संबंधित नियमों, फसल की क्षति तथा सर्वे रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।

2030 तक बागवानी को नई ऊंचाई पर ले जाने का लक्ष्य

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने उत्तराखंड में सेब और कीवी उत्पादन बढ़ाने के साथ हाई-डेंसिटी बागवानी को प्रोत्साहित करने की योजना का भी उल्लेख किया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक राज्य को बागवानी के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के बराबर पहुंचाने का है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने, बेहतर किस्मों को बढ़ावा देने, किसानों को तकनीकी सहायता देने और बागवानी क्षेत्र के विकास पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, मौजूदा समय में बारिश से प्रभावित किसानों को राहत देना भी बड़ी चुनौती है।

प्रदेश में फसलों को हुए नुकसान के बीच अब किसानों की निगाहें सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया पर टिकी हैं। प्रभावित क्षेत्र का सही आकलन, पात्र किसानों की पहचान और समय पर आर्थिक सहायता मिलने से किसानों को नुकसान की भरपाई करने में मदद मिल सकती है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow