रेलवे को मिला अब तक का सबसे बड़ा बजट, हाई-स्पीड भारत की रफ्तार तय

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Feb 3, 2026 - 02:37
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रेलवे को मिला अब तक का सबसे बड़ा बजट, हाई-स्पीड भारत की रफ्तार तय

बजट 2026–27: 2.93 लाख करोड़ का कैपेक्स, 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर और नया मालवाहक नेटवर्क

भारतीय रेल देश की आर्थिक प्रगति और आधुनिक अवसंरचना विकास की दिशा में एक नए युग में प्रवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। केन्द्रीय बजट 2026–27 में भारतीय रेल के लिए 2,93,030 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) प्रस्तावित किया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा रेल बजट आवंटन है। यह आवंटन रेलवे अवसंरचना को सुदृढ़ करने, क्षमता विस्तार और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के सरकार के निरंतर और दीर्घकालिक विजन को दर्शाता है।

इस वर्ष के बजट में रेलवे के लिए कुल आवंटन पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ किया गया है। सरकार का मुख्य फोकस हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स दक्षता, तथा रेल सुरक्षा के आधुनिकीकरण पर केंद्रित है। इस निवेश का उद्देश्य रेलवे को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनाना और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाना है।

सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर: ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ की घोषणा

दीर्घकालिक दृष्टिकोण के तहत, सरकार ने देश के प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है, जिन्हें ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में देखा जा रहा है। ये प्रस्तावित कॉरिडोर हैं—

  • मुंबई–पुणे

  • पुणे–हैदराबाद

  • हैदराबाद–बेंगलुरु

  • हैदराबाद–चेन्नई

  • चेन्नई–बेंगलुरु

  • दिल्ली–वाराणसी

  • वाराणसी–सिलीगुड़ी

इन कॉरिडोरों के विकसित होने से शहरों के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी और यात्रियों के लिए तेज़, सुरक्षित और बहु-माध्यमीय यात्रा संभव हो सकेगी। इससे न केवल व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को भी मजबूती मिलेगी।

दक्षिण भारत में बनेगा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चेन्नई–बेंगलुरु–हैदराबाद हाई-स्पीड नेटवर्क दक्षिण भारत में एक हाई-स्पीड ट्रायंगल (या डायमंड) का निर्माण करेगा। यह नेटवर्क प्रमुख आईटी, औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगा।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित नेटवर्क के तहत:

  • चेन्नई–बेंगलुरु यात्रा लगभग 1 घंटा 13 मिनट,

  • बेंगलुरु–हैदराबाद यात्रा लगभग 2 घंटे,

  • और चेन्नई–हैदराबाद यात्रा लगभग 2 घंटे 55 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

यह नेटवर्क कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए एक सशक्त विकास गुणक के रूप में कार्य करेगा।

पश्चिम, उत्तर और पूर्व भारत को भी मिलेगा बड़ा लाभ

पश्चिमी और मध्य भारत में मुंबई–पुणे हाई-स्पीड कॉरिडोर यात्रा समय को घटाकर लगभग 48 मिनट कर देगा। वहीं पुणे–हैदराबाद कनेक्टिविटी लगभग 1 घंटा 55 मिनट में संभव होगी, जिससे पश्चिम और दक्षिण भारत के बीच निर्बाध हाई-स्पीड नेटवर्क तैयार होगा।

उत्तरी और पूर्वी भारत में दिल्ली–वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर के माध्यम से यात्रा लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से पूर्वी भारत में एक नया आर्थिक गलियारा विकसित होगा, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को मजबूती से जोड़ेगा।

16 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना

रेल मंत्री ने बताया कि ये सातों हाई-स्पीड कॉरिडोर मिलकर लगभग 4,000 किलोमीटर में फैले होंगे और इनसे करीब 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इससे रेलवे भविष्य की गतिशीलता का एक प्रमुख स्तंभ बनेगा और देश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

माल ढुलाई के लिए नया समर्पित कॉरिडोर

माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स क्षमता को बढ़ाने के लिए बजट में डंकुनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक एक नए समर्पित मालवाहक कॉरिडोर (DFC) का प्रस्ताव किया गया है। लगभग 2,052 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा और मौजूदा पश्चिमी डीएफसी से जुड़ेगा।

रेल मंत्री ने बताया कि मौजूदा पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी पहले से ही लगभग पूर्ण क्षमता पर कार्य कर रहे हैं, जहां प्रतिदिन करीब 400 मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए नए कॉरिडोर की आवश्यकता महसूस की गई है।

सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये विशेष रूप से सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। मंत्री के अनुसार, पिछले वर्षों में किए गए सतत निवेश के चलते रेलवे दुर्घटनाओं में लगभग 95 प्रतिशत की कमी आई है।

सुरक्षा सुधारों के तहत ट्रैक, लोकोमोटिव, वैगन और कोच का बेहतर रखरखाव, कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का तेजी से विस्तार, सीसीटीवी कैमरे, ओवरहेड इलेक्ट्रिकल (OHE) सिस्टम का उन्नयन, स्टेशन पुनर्विकास और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

निष्कर्ष

रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, नया मालवाहक नेटवर्क और सुरक्षा पर विशेष फोकस के साथ भारतीय रेल देश के समग्र आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संतुलन और आधुनिक परिवहन प्रणाली की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार कर रही है। यह बजट भारतीय रेल को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

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