मोटे अनाजों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की पहल

Oct 24, 2026 - 12:31
 0  1
मोटे अनाजों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की पहल
मोटे अनाजों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की पहल

मयकोटी में छह दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन छात्र-छात्राओं एवं महिला समूहों को दी गई मोटे अनाजों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की जानकारी रुद्रप्रयाग, 23 अक्टूबर 2026। केदारनाथ हिमालय के पारंपरिक मोटे अनाजों को वैज्ञानिक तकनीक से जोड़कर राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के तीसरे दिन शुक्रवार को राजकीय इंटर कॉलेज जवाहर नगर, मयकोटी में छात्र-छात्राओं एवं महिला समूहों को मोटे अनाजों के महत्व, उनके पोषण मूल्य, प्रसंस्करण तथा स्वरोजगार की संभावनाओं के संबंध में जानकारी दी गई। रिपब्लिक फाउंडेशन सोसाइटी, उत्तराखंड तथा उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट), देहरादून के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मंडुवा, झंगोरा सहित उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाजों को आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता नियंत्रण, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं प्रभावी विपणन से जोड़ना है। इसके माध्यम से स्थानीय महिलाओं और युवाओं को कौशल विकास, उद्यमिता तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाज न केवल पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये प्रदेश की समृद्ध कृषि, सांस्कृतिक परंपरा और स्थानीय जीवनशैली का भी अभिन्न हिस्सा हैं। बदलते समय में इन उत्पादों की वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग, गुणवत्ता बनाए रखने, बेहतर पैकेजिंग और बाजार की मांग के अनुरूप प्रस्तुतीकरण के माध्यम से किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा स्थानीय युवाओं के लिए आय के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. सचि नेगी ने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित कौशल प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक अनाजों को आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक, गुणवत्ता मानकों और आकर्षक पैकेजिंग के साथ जोड़ा जाए, तो स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार अपनाने, छोटे उद्यम स्थापित करने तथा अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु का कार्य करती हैं। स्थानीय उत्पादों की पहचान विकसित करने, उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने और विपणन की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण के साथ-साथ व्यावहारिक जानकारी भी आवश्यक है। कार्यशाला में छात्र-छात्राओं एवं महिला समूहों की सहभागिता के माध्यम से स्थानीय कृषि उत्पादों के संरक्षण, वैज्ञानिक उपयोग तथा उद्यमिता की संभावनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। छह दिवसीय इस पहल के माध्यम से केदारनाथ हिमालय क्षेत्र के पारंपरिक मोटे अनाजों को नई पहचान दिलाने और स्थानीय समुदायों को आजीविका के बेहतर अवसरों से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। रिपब्लिक फाउंडेशन सोसाइटी एवं यूकॉस्ट की यह संयुक्त पहल स्थानीय कृषि विरासत के संरक्षण, महिला एवं युवा सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow