सिवान में पटाखा बनाने के दौरान जोरदार धमाका, कई मौतों से गांव में पसरा मातम
सिवान: बिहार के सिवान जिले के आलमापुर गांव में शुक्रवार शाम पटाखा बनाने के दौरान हुए विस्फोट ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। जामो थाना क्षेत्र में हुए इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई। धमाका इतना तेज था कि मकान को भारी नुकसान पहुंचा और घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद गांव में भय और मातम का माहौल है।
रुक-रुककर होते रहे विस्फोट
बताया जा रहा है कि अमरुद्दीन मियां के घर में कथित रूप से पटाखे बनाने का काम चल रहा था। शुक्रवार शाम करीब पांच बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद काफी देर तक विस्फोट की आवाजें आती रहीं। हालात ऐसे थे कि राहत और बचाव अभियान चलाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने हादसे में आठ लोगों की मौत का दावा किया है, जबकि सिवान के एसपी भरत सोनी ने शुरुआती जानकारी में पांच लोगों की मौत की पुष्टि की। मृतकों की अंतिम संख्या और घायलों के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए जामो थाना प्रभारी धीरज कुमार और चौकीदार चंद्रिका मांझी को निलंबित कर दिया गया है। घटना की जानकारी मिलने पर एसपी और जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस, अग्निशमन विभाग और मेडिकल टीम ने राहत कार्य संभाला, जबकि फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए।
लाइसेंस से लेकर विस्फोट की वजह तक होगी जांच
एसपी भरत सोनी ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर पूरे घटनाक्रम की जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाएगी कि पटाखे कहां से लाए जाते थे, निर्माण के लिए लाइसेंस था या नहीं और विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ। ग्रामीणों के मुताबिक, संबंधित परिवार लंबे समय से पटाखे के कारोबार में लगा हुआ था। स्थानीय मुखिया ने मृतकों में एक ही परिवार के सात लोगों के होने की बात कही है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और घायलों का इलाज जारी है।
पुराने हादसों के बाद भी नहीं थम रहे विस्फोट
बिहार में पटाखा और बारूद के अवैध कारोबार से जुड़े हादसों का इतिहास रहा है। भागलपुर के काजवलीचक में 4 मार्च 2022 को हुए विस्फोट में 14 लोगों की मौत हुई थी। इसी साल 24 जुलाई को सारण में पटाखा बनाने के दौरान हुए धमाके में पांच लोगों की जान गई थी। वहीं, 23 मार्च 2018 को नालंदा के सोहसराय में विस्फोट से छह लोगों की मौत हुई थी। सिवान की घटना ने एक बार फिर अवैध पटाखा निर्माण पर निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे कौन-सी लापरवाही जिम्मेदार थी और कथित कारोबार इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा।
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